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भारत की दो टूक- अधूरे सुधार से नहीं बदलेगी यूएनएससी की तस्वीर

By admin · · 3 min read · 5 views

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने यूएन की एक बैठक के दौरान कहा कि महज दो साल के कार्यकाल वाली अस्थायी सदस्यता श्रेणी के विस्तार को ही सहमति का संकेत मानना पूरी तस्वीर का केवल एक हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार महज अस्थायी सदस्य देशों की संख्या बढ़ाने तक ही सीमित रह गया, तो यह सुधार अधूरा और विफलता की कगार पर माना जाएगा, क्योंकि इससे यूएनएससी की असली निर्णय लेने वाली शक्ति संरचना (यानी स्थायी पांच देशों का नियंत्रण) नहीं बदलेगी। उन्होंने कहा कि देश और समूह बहुत लंबे समय से वास्तविक और सार्थक सुधारों का इंतजार कर रहे हैं।
हरीश ने सुरक्षा परिषद सुधारों (आईजीएन) पर भारत का पक्ष रखते हुए न केवल अस्थायी सीटों के विस्तार पर चेताया बल्कि ‘एलिमेंट्स पेपर’ में पारदर्शिता की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने स्थायी सदस्यता में विस्तार की मांग को अनदेखा करने पर चिंता जताते हुए, लिखित पाठ पर आधारित वार्ता के आह्वान को दोहराया।
न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में भारत के स्थायी मिशन ने हरीश के हवाले से एक बयान में कहा भारत ने ध्यान दिया है कि एलिमेंट्स पेपर को-चेयर का एक असेसमेंट है। इसका मतलब है कि डॉक्यूमेंट में आईजीएन डायनामिक्स, आम तौर पर और खास तौर पर पांच क्लस्टर्स की खासियत, को-चेयर की समझ और विचारों को दिखाती है। हमारे हिसाब से, यह न तो पूरी स्थिति को सही ढंग से दिखाता है और न ही ज़्यादातर सदस्य देशों की भारी भावनाओं को ध्यान में रखता है।
हरीश ने कहा भारत को पूरी उम्मीद है कि सह-अध्यक्ष हमारी बातों पर उचित ध्यान देंगे और ‘एलिमेंट्स पेपर’ को ज़्यादा निष्पक्ष बनाने के लिए उसमें ज़रूरी बदलाव करेंगे। भारत यह भी दोहराना चाहता है कि हम यूएनएससी में असली सुधार लाने की दिशा में सह-अध्यक्षों और दूसरे समूहों व सदस्य देशों की सभी ईमानदार कोशिशों का समर्थन करते रहेंगे।
भारतीय राजनयिक ने कहा कि अंतर सरकारी वार्ता प्रक्रिया को संयुक्त राष्ट्र की अन्य प्रक्रियाओं से अलग नहीं होना चाहिए और इन सभी वार्ताओं का आधार एक लिखित प्रस्ताव होना चाहिए, जिस पर सभी समूह और सदस्य देश अपनी राय देते हैं।
इसके साथ ही ‘ग्लोबल साउथ’ के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता जताते हुए हरीश ने कहा कि क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के मामले में अफ्रीकी देशों के बेहतर प्रतिनिधित्व के व्यापक समर्थन का सही तरीके से जिक्र नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले जहां स्थायी सीटों के विस्तार के पक्ष में अधिकतर देशों का समर्थन बताया जाता था, उसे अब घटाकर केवल ‘कुछ देशों का समर्थन’ कहा गया है, जो सही तस्वीर नहीं दिखाता। अधिकतर देश स्थायी सीटों के विस्तार के पक्ष में हैं, मगर इसे दस्तावेज में ठीक तरह से नहीं दिखाया गया है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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