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भारत-चीन संबंधों में सुधार के लिए ‘तीन आपसी सिद्धांत’ जरूरी

By Gangesh M · · 3 min read · 7 views

नई दिल्ली। भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों को लेकर एक बार फिर भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार केवल ‘तीन आपसी सिद्धांतों’ के व्यावहारिक और ऊंचे ढांचे पर ही आगे बढ़ सकता है।
यह बयान हाल ही में राजधानी दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक के बाद आया है। विदेश मंत्रालय ने साफ तौर पर रेखांकित किया कि भविष्य में दोनों देशों के रिश्तों की दिशा और दशा इन तीन मुख्य स्तंभों पर टिकी होगी। इन सिद्धांतों में पहला आपसी सम्मान है, जिसके तहत दोनों देशों को एक-दूसरे की संप्रभुता, अखंडता और रणनीतिक प्राथमिकताओं का पूरा सम्मान करना होगा। दूसरा सिद्धांत आपसी संवेदनशीलता है, जिसके अनुसार दोनों पक्षों को एक-दूसरे के मुख्य व बुनियादी हितों और चिंताओं के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए। तीसरा और अंतिम स्तंभ आपसी हित है, जो यह स्पष्ट करता है कि वैश्विक और क्षेत्रीय मंचों पर संबंधों का विकास दोनों देशों के साझा हितों को ध्यान में रखकर ही किया जा सकता है।
प्रवक्ता जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग की वीडियो ‘एक्स’ पर साझा की है, जिसमें उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना किसी भी द्विपक्षीय बातचीत और सामान्य संबंधों की बहाली के लिए सबसे अनिवार्य शर्त है। भारत का मानना है कि जब तक सीमा पर तनाव पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक अन्य क्षेत्रों में रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते।
प्रेस वार्ता के दौरान यह भी कहा गया कि भारत और चीन जैसे बड़े देशों को एक दीर्घकालिक और रणनीतिक नजरिया अपनाना चाहिए। दोनों पक्षों को इस बात का प्रयास करना होगा कि उनके बीच के मतभेद किसी बड़े विवाद में न बदलें। सीमा मुद्दों के एक निष्पक्ष, तर्कसंगत और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के लिए दोनों देश राजनयिक और सैन्य स्तर पर निरंतर रचनात्मक बातचीत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कड़ा और स्पष्ट रुख चीन को यह संदेश देता है कि आर्थिक या व्यापारिक मोर्चे पर आगे बढ़ने से पहले उसे सीमा पर विश्वसनीयता और विश्वास बहाल करना होगा।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

Gangesh M

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