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संसदीय सहयोग को बढ़ावा देगा श्रीलंकाई महिला सांसदों का भारत दौरा

By admin · · 3 min read · 5 views

नई दिल्ली। श्रीलंका की महिला सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने भारत का अपना पहला ऐतिहासिक और आधिकारिक दौरा संपन्न किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच संसदीय सहयोग को गहरा करना और महिला नेतृत्व के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना था। इसका आयोजन संसदीय अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (प्राइड) द्वारा भारतीय विदेश मंत्रालय के सहयोग से किया गया था।
कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने एक बयान में कहा इस 19-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व श्रीलंका की महिला एवं बाल मामलों की मंत्री सरोजा सावित्री पॉलराज ने किया। समूह में 15 श्रीलंकाई सांसदों के साथ ही 4 अधिकारी भी शामिल रहे। यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायका के उस साझा दृष्टिकोण के अनुरूप थी, जिसका उद्देश्य संसदीय सहयोग को गहरा करना और भारत तथा श्रीलंका की महिला नेताओं के बीच संबंधों को मजबूत करना है।
प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इस दौरान बिरला ने भारत के ऐतिहासिक ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देता है) पर प्रकाश डाला। इसके अलावा केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी के साथ भी प्रतिनिधिमंडल की विस्तृत चर्चा हुई। इसमें ‘मिशन शक्ति’, ‘मिशन वात्सल्य’ और ‘पोषण 2.0’ जैसी भारत की प्रमुख योजनाओं को साझा किया गया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रतिनिधिमंडल का औपचारिक स्वागत किया और ‘महिलाओं के नेतृत्व में विकास’ पर चर्चा की। इस दौरान फिक्की लेडीज ऑर्गनाइजेशन’ ने आर्थिक विकास और नवाचार में महिलाओं की भूमिका पर एक गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया। वहीं लोकसभा सचिवालय के संसदीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान ने श्रीलंकाई सांसदों को भारतीय विधायी प्रक्रियाओं, जेंडर बजटिंग (लैंगिक बजट) और संसदीय समिति प्रणाली के बारे में प्रशिक्षित किया।
भारतीय उच्चायोग ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) का दौरा कर समावेशी सेवा वितरण में डिजिटल पहचान की भूमिका को समझा। इसके अलावा, सदस्यों ने प्रधानमंत्री संग्रहालय, इंडिया गेट,वॉर मेमोरियल और आगरा के ताजमहल का भी भ्रमण किया।
उच्चायोग ने कहा इस यात्रा ने संसदीय जुड़ाव को और गहरा करने तथा विकास संबंधी अनुभवों को साझा करने के प्रति भारत और श्रीलंका की निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराया। इसके साथ ही, इसने दोनों देशों में समावेशी और सतत विकास को आगे बढ़ाने में महिलाओं के नेतृत्व वाले बदलाव और संस्थागत सहयोग के महत्व को भी रेखांकित किया।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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