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वेनिस बिएनाले में अपनी चमक बिखेर रहा भारतीय पवेलियन ‘रिमेंबरिंग होम’

By admin · · 3 min read · 161 views

वेनिस। विश्व की सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनियों में से एक, वेनिस बिएनाले में भारतीय कला की अद्भुत झलक देखने को मिल रही है। इस बार भारत पवेलियन की थीम ‘दूरियों का भूगोल: घर की यादें’ रखी गई है। यह थीम बदलती दुनिया में घर की भावना, स्मृति, प्रवासन और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है।
वेनिस बिएनाले 2026 (61वीं अंतर्राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी) में भारत ने 7 साल के लंबे अंतराल के बाद अपने राष्ट्रीय पवेलियन (भारत मंडप) के साथ धमाकेदार वापसी की है। इस ऐतिहासिक प्रदर्शनी का आधिकारिक उद्घाटन केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने वेनिस, इटली के ऐतिहासिक ‘आर्सेनाले’ स्थित आइसोलोटो गोदाम में किया। यह प्रदर्शनी 9 मई से 22 नवंबर 2026 तक जनता के लिए खुली रहेगी।
इस विशेष प्रदर्शनी का संयोजन (क्यूरेशन) प्रसिद्ध कला विशेषज्ञ डॉ. अमीन जाफर द्वारा किया गया है। संस्कृति मंत्रालय ने इस मंडप को नीता मुकेश अंबानी सांस्कृतिक केंद्र (एनएमएसीसी) और सेरेन्डिपिटी आर्ट्स फाउंडेशन के साथ सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) के तहत प्रस्तुत किया है।
इटली स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा 61वें वेनिस बिएनाले में इंडियन पवेलियन दर्शकों को यादों, अपनेपन और पहचान की एक यात्रा पर ले जाता है। ‘दूरियों का भूगोल: घर की यादें’ समकालीन भारतीय कलात्मक अभिव्यक्ति से गढ़ा गया एक मनमोहक अनुभव प्रदान करता है।
इसके अलावा भारत की सार्वजनिक कूटनीति को दर्शाने वाले विदेश मंत्रालय के ‘इंडियन डिप्लोमेसी’ के एक्स अकाउंट से भी भारतीय पवेलियन द्वारा दी गई शानदार प्रस्तुति को साझा किया गया। इस पोस्ट में लिखा गया शानदार परफॉर्मेंस से लेकर मनमोहक इंस्टॉलेशन तक, वेनिस बिएनाले में इंडिया पवेलियन दुनिया भर के दर्शकों को लगातार अपनी ओर खींच रहा है।
इस प्रदर्शनी में भारत की ओर से पांच प्रमुख समकालीन कलाकार अलवर बालासुब्रमण्यम (बाला), रंजनी शेट्टार, सुमाक्षी सिंह, स्कार्मा सोनम ताशी और आसिम वक़ीफ़ की कृतियां एक साथ प्रस्तुत की गई हैं, जिनकी कलाकृतियां गहन परिवर्तन के दौर में घर के अर्थ को प्रतिबिंबित करती हैं।
भारतीय सभ्यता में गहराई से निहित सामग्रियों, जैसे मिट्टी, धागा, बांस, पेपर-मैशे और हाथ से निर्मित प्राकृतिक संरचनाओं के माध्यम से एकजुट ये कृतियां द्विवार्षिक प्रदर्शनी के मुख्य विषय, ‘इन माइनर कीज़’, को दर्शाती हैं। पूरे पवेलियन में घर खंडित, अधर में लटका हुआ, ढांचे पर टिका हुआ और पुनर्कल्पित रूप में दिखाई देता है। ये कृतियां परिवर्तन की एक साझा स्थिति को दर्शाती हैं और कलाकार मिलकर एक ऐसी सामूहिक आवाज का निर्माण करते हैं, जो भारतीय पहचान में गहराई से निहित होने के साथ ही वैश्विक स्तर पर भी गूंजती है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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