Wednesday, 22 July 2026
Latest News

यूएन में बोला भारत- सप्लाई चेन टूटने से बचाने के लिए मजबूत सहयोग अनिवार्य

By admin · · 3 min read · 6 views

न्यूयॉर्क। भारत ने संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ईकोसॉक) की ‘ऊर्जा और आपूर्ति प्रवाह की सुरक्षा’ पर आयोजित विशेष बैठक में पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न ऊर्जा और उर्वरक संकट पर अपना पक्ष रखा।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी० हरीश ने बैठक में भारत का पक्ष रखते हुए पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा और उर्वरक संकट से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तत्काल अल्पकालिक कदमों के साथ-साथ दीर्घकालिक संरचनात्मक उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को टूटने से बचाने के लिए दुनिया के देशों के बीच मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग अनिवार्य है।
इसके अलावा भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा और नौवहन की अबाध स्वतंत्रता में आ रही बाधाओं को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। भारत ने साफ तौर पर कहा कि व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना, नागरिक चालक दल की जान खतरे में डालना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में बाधा उत्पन्न करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। भारत ने इस रणनीतिक मार्ग में नौवहन की स्वतंत्रता को बाधित करने के प्रयासों पर गहरी चिंता व्यक्त की। भारत ने जोर दिया कि यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है।
हरीश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बैठक की तस्वीर साझा करते हुए लिखा ईकोसॉक की ‘ऊर्जा और आपूर्ति प्रवाह की सुरक्षा’ पर आयोजित विशेष बैठक में, पश्चिम एशिया संघर्ष के संदर्भ में, हालिया ऊर्जा और उर्वरक संकट के प्रति भारत के दृष्टिकोण को साझा किया। इस संकट से निपटने के लिए अल्पकालिक और संरचनात्मक उपायों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा इस बात को दोहराया गया कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना, नागरिक चालक दल को खतरे में डालना और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा डालना, ये सभी कृत्य अस्वीकार्य हैं। इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय कानून का पूर्ण सम्मान किया जाना चाहिए।
बता दें कि ईकोसॉक संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक है। यह वैश्विक आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर चर्चा, नीति-निर्माण और समन्वय का मुख्य मंच है। यह सतत विकास के लक्ष्यों (एसडीजी) को आगे बढ़ाने, मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और यूनेस्को, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) व खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) जैसी यूएन की विशेष एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने का कार्य करता है। भारत वैश्विक सामाजिक और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने में सक्रिय रूप से योगदान देता रहा है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

admin

Leave a Comment