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समुद्री सहयोगः ‘डाइवेक्स-26’ के लिए कोलंबो पहुंचा आईएनएस निरीक्षक

By admin · · 3 min read · 8 views

कोलंबो। भारतीय नौसेना का डाइविंग सपोर्ट और सबमरीन रेस्क्यू जहाज, आईएनएस निरीक्षक श्रीलंकाई राजधानी कोलंबो पहुंचा। यह जहाज द्विपक्षीय गोताखोरी अभ्यास ‘आईएन-एसएलएन डाइवेक्स 2026’ के चौथे संस्करण में भाग लेने के लिए एक सप्ताह की यात्रा पर है। यह पड़ोसी देश के साथ समुद्री सहयोग के तौर पर एक बेहतर कदम है और इस दौरान भारत की ओर से ‘आरोग्य मैत्री’ पहल के तहत श्रीलंकाई अधिकारियों को दो भीष्म क्यूब्स तथा श्रीलंकाई नौसेना को गोला-बारूद भी भेंट किया जाएगा।
यह कदम भारत व श्रीलंका के बीच समुद्री संबंधों और साझा समुद्री हितों को मजबूत करने की लगातार प्रतिबद्धता को और पुख्ता करता है। 21 से 27 अप्रैल तक चलने वाले इस अभ्यास का मुख्य लक्ष्य दोनों नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता, सामंजस्य और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। कोलंबो बंदरगाह पहुंचने पर श्रीलंकाई नेवी ने जहाज का पारंपरिक नौसैनिक अंदाज में स्वागत किया। जहाज के कमांडिंग ऑफिसर, कमांडर शैलेश त्यागी ने श्रीलंका के पश्चिमी नौसेना क्षेत्र के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल एस. जे. कुमारा से मुलाकात की और आपसी हितों के मामलों पर चर्चा की।
पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है भारत की मानवीय सहायता पहल के तहत, यह जहाज भारत सरकार की ‘आरोग्य मैत्री’ पहल के तहत श्रीलंकाई अधिकारियों को दो भीष्म (भारत हेल्थ इनिशिएटिव फॉर सहयोग, हित एंड मैत्री) क्यूब्स भेंट करेगा। ये अत्याधुनिक पोर्टेबल मेडिकल यूनिट्स हैं, जो 200 आपातकालीन मामलों को संभालने में सक्षम हैं। इन्हें तेजी से मदद पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है और इनमें बुनियादी प्रक्रियाओं के लिए जरूरी दवाएं और सर्जिकल उपकरण मौजूद हैं। समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करते हुए, भारतीय नौसेना श्रीलंकाई नौसेना को 9 एमएम गोला-बारूद के 50,000 राउंड भी सौंपेगी।
बयान में कहा गया है यह एक अहम द्विपक्षीय कार्यक्रम है, जो भारत-श्रीलंका के बीच गहरे समुद्री संबंधों का एक जीता-जागता सबूत है। सहयोगी देशों के साथ लगातार समुद्री सहयोग और जुड़ाव ‘महासागर’ विजन के अनुरूप हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता, सहयोग और सामूहिक विकास को बढ़ावा देने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
बता दें कि भारत अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और ‘महासागर’ विजन के अनुरूप श्रीलंका का विभिन्न क्षेत्रों में लगातार सहयोग करता रहा है। इस दौरे पर अब भीष्म क्यूब भेंट करने से हमारे पड़ोसी देश के लिए प्राकृतिक आपदाओं या मानवीय संकटों के दौरान तत्काल जीवनरक्षक चिकित्सा सहायता उपलब्ध होगी। साथ ही भारत की ओर से दिए जाने वाले डिफेंस आइटम से श्रीलंकाई नेवी की ताकत में और इजाफा होगा।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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