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म्यांमार में भारत के सहयोग से कृषि क्षेत्र से जुड़े 2 प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन

By admin · · 3 min read · 7 views

नेपीडॉ। म्यांमार की राजधानी नेपीडॉ की येजिन टाउनशिप में भारत द्वारा समर्थित कृषि क्षेत्र से जुड़े दो क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स (क्यूआईपी) का उद्घाटन किया गया। भारत की वित्तीय सहायता से पूर्ण इन परियोजनाओं से स्थानीय किसानों को लाभ पहुंचेगा और पड़ोसी देश में कृषि से जुड़े शिक्षण एवं अनुसंधान को भी बढ़ावा मिलेगा।
भारत के सहयोग से म्यांमार को उन्नत कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा केंद्र (एसीएआरई) के कार्यान्वयन के अलावा कृषि विकास एवं किसान कल्याण के लिए ड्रायर तथा ड्रायर हाउस की सौगात दी गई है। येजिन एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी तथा कृषि अनुसंधान विभाग के सहयोग से इन प्रोजेक्ट्स पर काम हुआ है, जिनके कार्यान्वयन से देश के कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की अपार संभावनाएं खुल गई हैं।
म्यांमार स्थित भारतीय दूतावास ने एक आधिकारिक बयान में कहा इन प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन राजदूत अभय ठाकुर ने कृषि, पशुधन और सिंचाई उप मंत्री डॉ. टिन हटुट और संबंधित म्यांमार अधिकारियों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया। उद्घाटन के बाद दोनों प्रोजेक्ट स्थलों का दौरा किया गया।
दूतावास ने कहा येजिन में राइस बायो-पार्क में स्थापित ड्रायर हाउस स्थानीय किसानों के फायदे के लिए धान और चावल के बेहतर कटाई के बाद के प्रबंधन में योगदान देगा। वहीं एसीएआरई नॉलेज रिपॉजिटरी अपने लर्निंग सिस्टम और कंप्यूटर तथा सर्वर सिस्टम सहित सहायक हार्डवेयर के माध्यम से कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान पर ज्ञान साझा करने तथा शैक्षणिक जुड़ाव में मदद करेगा।
येजिन टाउनशिप में एसीएआरई और राइस बायो-पार्क, म्यांमार में एग्रीकल्चर सेक्टर में भारत के डेवलपमेंट कोऑपरेशन इनिशिएटिव को दिखाते हैं। मेकांग-गंगा कोऑपरेशन (एमजीसी) फ्रेमवर्क के क्यूआईपी इनिशिएटिव के तहत ये दो प्रोजेक्ट्स एग्रीकल्चर एजुकेशन और रिसर्च, नॉलेज मैनेजमेंट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सहित कई सेक्टर्स में फैले टारगेटेड, लोगों पर केंद्रित इनिशिएटिव्स के जरिए म्यांमार के सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट को सपोर्ट करने की भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को भी दर्शाते हैं।
बता दें कि भारत अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के तहत म्यांमार की विभिन्न क्षेत्रों में लगातार मदद करता रहा है। अब भारत की ओर से कृषि क्षेत्र में किए गए सहयोग से पड़ोसी देश न केवल अपने कृषि उत्पादन में वृद्धि कर पाएगा, बल्कि उसे कुशल कृषि वैज्ञानिक तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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