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अब भी हर कोई पीके को ‘रोस्ट’ करने से बाज नहीं आ रहा(शाश्वत तिवारी)

By admin · · 4 min read · 9 views

माना कि प्रशांत किशोर बिहार चुनाव में सुपर फ्लॉप साबित हुए हैं। लेकिन गलती क्या है प्रशांत किशोर की ? यही ना कि वो बड़ी-बड़ी बातें कर रहा था। ओवर कॉन्फिडेंस में दिख रहा था और चैलेंज के साथ ऐलान कर रहा था। लेकिन ये सब करना अपराध थोड़ी है। महात्मा गांधी ने 1942 में चैलेंज के साथ कहा था कि अंग्रेजों भारत छोड़ो तो क्या 1942 में अंग्रेजो ने भारत छोड़ दिया था ? महात्मा गांधी को मालूम था कि आजादी के लिए यह एक जरूरी प्रोसेस है।
प्रशांत किशोर तीन साल से पैदल चलकर बिहार की जनता से संवाद कर रहे थे। उन्हें भरोसा दिला रहे थे कि वे पलायन रोकेंगे, रोजगार देंगे, फैक्टी लगाएंगे, एजुकेशन देंगे। और उन्होंने जनता पर भरोसा कर लिया। उसी जनता पर जिस जनता के बीच वे पहुंचे थे।
मैं तो यह बात भी मानने के लिए तैयार हूँ कि प्रशांत किशोर ने रूहानी खयाल के लिए ही सही, उसने एक सही सपना तो दिखाया कि तुम्हारा मुद्दा जाति, धर्म, अमीरी- गरीबी, ये सब नहीं है।
मैं तो ये भी मानने के राजी हूँ कि प्रशांत किशोर का ये सब एजेंडा एकदम झूठा था, लेकिन इतनी तारीफ तो फिर भी कर ही देनी चाहिए कि वो अपने एजेंडे के लिए भी, मुद्दे अच्छे लेकर आया। बाकी लोग तो गलत एजेंडा भी अच्छी बात और मुद्दों पर नहीं बनाते।
प्रशांत किशोर यही कह रहा था ना कि वो पढ़ा लिखा है, बहुत ऊपर का सोचता है। उसने दुनिया घूमी है, दुनिया को देखा है। तो क्या ही गलत कह रहा था ? उसे लगा होगा कि पढ़े लिखे लोगों की दुनिया इज्जत करती है। उन पर भरोसा करती है। अगर खुद की काबिलियत का यकीन कोई शख्स अपने लोगों को और अपने समाज को दिला रहा है तो वह कोई अपराध तो बिल्कुल नहीं कर रहा है।
एक कहावत है कि “गुड़ ना दे कम से कम गुड़ जैसी बात तो करे” हो सकता है पीके भी अगर चुनाव जीतता तो उसके सब वादे हवा – हवाई निकल जाते लेकिन एक पल के लिए ही सही, वो जो बात कर रहा था, जो सुनने में विजनरी थी। वरना चार दशक में तो बिहार की जनता ने ऐसी बातें भी कहां सुनी होंगी।
सब मान रहे हैं कि पीके लूजर है, क्योंकि उसने गलती ये कर दी कि अब तक चुनाव लड़वाए थे और इस बार खुद लड़ लिया। लेकिन असली तारीफ तो इस बात की बनती है कि ये बड़ा जोखिम उठा गया और जब तक हार नहीं गया तब तक खुद को सबसे मजबूत दिखाए रखा।
हिंदुस्तान ने विजेताओं की स्तुतियां हमेशा सुनाई गई हैं। यह तपस्वियों को शिरोधार्य करने वाला देश है। पीके आज चौतरफा पराजित हैं, लेकिन तीन साल की उनकी यात्रा मेहनत की इंतिहा है।
राजस्थान में एक महान विचारक हुए हैं, आयुवान सिंह हुड़ील जो महाराजा हनुवंत सिंह, गायत्री देवी, महारावल लक्ष्मण सिंह के राजनीतिक सलाहकार थे। कांग्रेस के खिलाफ उन्होंने रामराज्य परिषद, स्वतंत्र पार्टी के लिए रणनीतिकार का काम किया लेकिन खुद का चुनाव हार बैठे थे। लेकिन उसके बाद भी हुड़ील साहब की वैचारिकी के आसपास बहुत कम लोग ठहर पाते हैं।
पीके चुनाव के प्रदर्शन में फ्लॉफ हो चुके हैं, मान लेना चाहिए लेकिन उससे पहले हर मंच पर उनकी प्रतिभा में ये देश अगणित कशीदे गढ़ चुका है। जिनमें प्रतिभा है वे अपने लिए रास्ता बना लेते हैं यक़ीनन पीके भी एक दिन बना ही लेंगे।
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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