Wednesday, 22 July 2026
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भारत ने यूएन ढांचे को पुनः डिजाइन कर उद्देश्य-अनुकूल बनाने की वकालत की

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19 नवंबर, न्यूयॉर्क। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के ढांचे को पुनः डिजाइन करके इसे उद्देश्य-अनुकूल बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। भारत ने कहा है कि लगभग दो दशकों में इस मंच पर हमने जो कुछ भी देखा है, वह कोई कार्रवाई नहीं, बल्कि एक बेकार का विलंब, प्रक्रियात्मक कलाबाजी और एक बीते युग की प्रतिनिधि 80 साल पुरानी संरचना को बदलने के प्रति एक शांत, सुनियोजित प्रतिरोध है। यह स्थिति न तो समतापूर्ण और न ही विश्वसनीय। इसलिए इस ढांचे में बदलाव की जरूरत है।
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि राजदूत योजना पटेल ने 18 नवंबर को यहां आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा के पूर्ण अधिवेशन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए यह टिप्पणी की। पटेल ने ‘सुरक्षा परिषद की सदस्यता में समान प्रतिनिधित्व और वृद्धि’ पर अपना वक्तव्य देते हुए यूएन में सुधार पर अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) का हवाला दिया।
उन्होंने कहा आईजीएन की शुरुआत के बाद से 17 वर्षों में एक बेतुके रंगमंच में तब्दील हो गया है। सदस्य देश बयानों और चर्चाओं के कभी ना खत्म होने वाले ऐसे चक्र में फंसे हैं, जिनका कोई नतीजा नहीं निकलता। पटेल ने कहा कि भारत पारदर्शी लक्ष्यों और समय-सीमाओं के साथ पाठ-आधारित वार्ताओं को शीघ्र शुरू करने के अपने आह्वान को दोहराता है। केवल यही आईजीएन प्रक्रिया की विश्वसनीयता सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि भारत को उम्मीद है कि आईजीएन के नवनियुक्त सह-अध्यक्ष मौजूदा सत्र के दौरान चर्चाओं को ठोस परिणामों तक ले जा पाएंगे।
भारतीय राजदूत ने अफ्रीका और ग्लोबल साउथ के विरुद्ध हुए ऐतिहासिक अन्याय को याद दिलाते हुए उसके लिए भी स्थायी सदस्यता की वकालत की। उन्होंने कहा एजेंडे पर प्रगति सदस्य देशों की इस प्रयास में दूरदर्शी और रचनात्मक तरीके से सार्थक योगदान देने की प्रतिबद्धता पर निर्भर है। भारत सभी सदस्य देशों से इस संबंध में एकजुट होने का आग्रह करता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रभावी कामकाज के व्यापक हित के लिए संकीर्ण विचारों और संकीर्ण दृष्टिकोणों को अलग रखना आवश्यक है।
बता दें कि भारत समेत कई अन्य देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की लंबे समय से मांग कर रहे हैं। वैश्विक मंचों पर कई बार इस मुद्दे को उठाया गया है। हालिया अपडेट में भारत ने यूएनएससी में सुधार के लिए लगभग दो दशक से चल रही निरर्थक वार्ता को “हास्यास्पद नाटक” बताते हुए एक रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए कहा है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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