Wednesday, 22 July 2026
Latest News

एक उभरता हुआ एजेंडा/ भारत-जापान साझेदारी पहले से कहीं अधिक मूल्यवान

By admin · · 3 min read · 5 views

नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भारत-जापान हिंद-प्रशांत मंच को संबोधित करते हुए भारत और जापान के बीच लगातार गहरी होती साझेदारी पर जोर दिया। अपने संबोधन में इस बात पर जोर देते हुए कि भारत-जापान संबंध ‘पहले से कहीं अधिक मूल्यवान’ हैं, उन्होंने कहा कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक स्थिरता को बढ़ाता है और साथ ही वैश्विक आर्थिक विकास में भी योगदान देता है।
डॉ. जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक बदलावों के अनुरूप द्विपक्षीय साझेदारी निरंतर विकसित हो रही है। उन्होंने कहा हमारे द्विपक्षीय संबंध बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप हैं और यह विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग में परिलक्षित होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पीएम ताकाइची के पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद हुई बातचीत का जिक्र करते हुए, विदेश मंत्री ने इसे “इस बात का प्रमाण” बताया कि हम दोनों इसे कितनी प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा का भी स्मरण किया, जिसमें अगले दशक के लिए एक साझा दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी और जिसकी परिणति सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा के रूप में हुई थी।
विदेश मंत्री ने कई नई पहलों का हवाला दिया जो इस दूरदर्शी एजेंडे का उदाहरण हैं, जिनमें अगली पीढ़ी की गतिशीलता साझेदारी, आर्थिक सुरक्षा पहल, संयुक्त ऋण व्यवस्था, स्वच्छ हाइड्रोजन और अमोनिया पर संयुक्त घोषणा, और खनिज संसाधनों के क्षेत्र में एक समझौता ज्ञापन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये “एक उभरते हुए समकालीन एजेंडे” का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो द्विपक्षीय संबंधों को निरंतर मजबूत कर रहा है।
सांस्कृतिक और शैक्षिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. जयशंकर ने कहा मानव संसाधन सहयोग और आदान-प्रदान की कार्य योजना से लोगों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। जैसे-जैसे ये आगे बढ़ेंगे, हम सामाजिक स्तर पर एक गहरी समझ विकसित होने की उम्मीद कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि ये पहल मिलकर भारत-जापान संबंधों की रणनीतिक और व्यापक प्रकृति की पुष्टि करती हैं। उन्होंने आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन में और अधिक सहयोग तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अर्धचालकों, महत्वपूर्ण खनिजों, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष में गहन निवेश का भी आह्वान किया।
मंत्री ने कहा कि दो प्रमुख लोकतंत्रों और समुद्री राष्ट्रों के रूप में, भारत और जापान “हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति एक बड़ी ज़िम्मेदारी” साझा करते हैं। उन्होंने हिंद-प्रशांत महासागर पहल पर प्रकाश डाला, जहां जापान समुद्री व्यापार, परिवहन और संपर्क स्तंभ का सह-नेतृत्व करता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि में पारस्परिक योगदान को आगे बढ़ाने के लिए एक प्रमुख मंच है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

admin

Leave a Comment