Wednesday, 22 July 2026
Latest News

तकनीकी शक्ति ही नहीं, बौद्धिक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर रहा भारत

By admin · · 2 min read · 3 views

नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने यहां समहिता सम्मेलन (दक्षिण एशिया की पांडुलिपि परंपराएं एवं गणितीय योगदान) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने दक्षिण एशिया की पांडुलिपि परंपराओं और गणितीय योगदान की महत्ता को रेखांकित किया और भारत के बौद्धिक इतिहास को वर्तमान तथा भविष्य से जोड़ते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। इस सम्मेलन में देश-विदेश के कई विद्वान, शोधकर्ता और छात्र शामिल हुए, जिन्होंने दक्षिण एशिया की प्राचीन ज्ञान परंपराओं पर गहन चर्चा की।
अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा जैसे-जैसे भारत दुनिया के साथ अपने संबंधों को और मजबूत कर रहा है, वैसे-वैसे यह आवश्यक हो गया है कि हम आत्मनिर्भरता की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ें। आत्मनिर्भरता महज आर्थिक क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका गहरा संबंध राष्ट्रीय आत्मविश्वास और बौद्धिक नेतृत्व से भी है। हमारे अतीत की समझ और पहचान हमें यह तय करने में मदद करती है कि हम भविष्य में क्या बनेंगे, इसलिए यह जानना कि हम कौन थे और आज क्या हैं, बहुत जरूरी है।
विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जैसे-जैसे भारत दुनिया के साथ जुड़ाव की प्रक्रिया को तेज कर रहा है, वैसे-वैसे और अधिक आत्मनिर्भरता के लिए एक मजबूत तर्क सामने आ रहा है, जो राष्ट्रीय आत्मविश्वास की नींव पर भी टिका है। उनका कहना है कि हम कौन थे और हम क्या हैं, यही तय करेगा कि हम क्या बनेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत केवल एक आधुनिक तकनीकी शक्ति के रूप में ही नहीं, बल्कि एक बौद्धिक और सांस्कृतिक नेतृत्वकर्ता के रूप में भी उभर रहा है।
जयशंकर ने कहा हमारे समाज पर, कुछ मायनों में, हमारी सीमाओं के पार से हमला किया गया है और बौद्धिक लागत, मानवीय लागत की तो बात ही छोड़ दें, ये बहुत बड़ी रही है। नालंदा विश्वविद्यालय को जलाने की घटना से ज्यादा स्पष्ट उदाहरण शायद कोई और नहीं हो सकता, जिसके निशान आज भी कई क्षेत्रों में दिखाई देते हैं।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

admin

Leave a Comment