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मोदी न झुकेगा, न रुकेगा(शाश्वत तिवारी)

By admin · · 6 min read · 162 views

भारतीय वस्तुओं के निर्यात पर ट्रंप का 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू हो गया।  
कारोबारियों का कहना है कि ट्रम्प टैरिफ का बाज़ार के सेंटीमेंट्स पर असर पड़ा लेकिन ये ज्यादा समय नहीं रहेगा और देर सबेर उछाल आएगा।
भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर साल भर पहले जो टैरिफ केवल 3% था, उसमें 50% और जुड़ गया। भारत, अमेरिका को 90 अरब डॉलर का सामान बेचता है, अब इनमें से 60 अरब डॉलर के माल पर 50% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया गया है। ये भारतीय उद्योग के लिए बड़ी चुनौती है। इसका असर भारत के कपड़ा, गारमेंट्स, जेवरात, हीरा, shrimps, कारपेट और फर्नीचर उद्योग पर ज्यादा होगा। कुछ महीने के लिए इन फैक्ट्रियों के पास ज्यादा काम नहीं होगा।
नोट करने की बात ये है कि ट्रंप ने उन चीजों पर कोई टैरिफ नहीं लगाया है जिनकी जरूरत अमेरिका को है। इनमें स्मार्टफोन, दवाएं, और पेट्रोलियम उत्पाद शामिल हैं। नए रेट से हमारे टेक्सटाइल और कपड़ों पर आज से 62% टैरिफ लागू हो गया। इसका फायदा बांग्लादेश और मैक्सिको के कारोबारियों को होगा। उदाहरण के तौर पर हमारे यहां से जो शर्ट्स अमेरिका को निर्यात होती हैं, उन पर इस समय 12% ड्यूटी लगती है, जो अब से 62% हो गई। भारत में बनी शर्ट्स जब अमेरिकी बाजार में मंहगी होंगी, तो इसका फायदा वियतनाम को होगा जिसके सामान पर सिर्फ 20% टैरिफ है।
भारत अमेरिका को जो हीरा, सोना और जेवरात एक्सपोर्ट करता है, उसका वॉल्यूम अमेरिका के व्यापार में सबसे ज्यादा 40% है। अब तक इस पर सिर्फ 2% टैरिफ था, ये अब से बढ़कर 52% हो गया। इसका असर सूरत और जयपुर जैसे शहरों के व्यापारियों और कारीगरों पर पड़ेगा। यानि ये तो साफ है कि ट्रंप के टैरिफ का नकारात्मक असर तो पड़ेगा। आकलन इस बात का करना है कि ये असर कितना होगा।
पीएम नरेन्द्र मोदी टैरिफ पर तत्काल जवाबी कदम उठाने के मूड में नहीं हैं। भारत ने अपने टेक्सटाइल, सी-फूड, लेदर, जेम्स ऐंड जूलरी एक्सपोर्टर्स के लिए outreach करने का फ़ैसला किया है। सरकार रूस, यूरोपियन यूनियन, ब्रिटेन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया समेत क़रीब 40 देशों से बातचीत कर रही है, जिससे इन देशों के साथ कारोबार बढ़ाया जा सके और अमेरिकी टैरिफ से निर्यात में आने वाली कमी की भरपाई की जा सके।
पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में अमेरिका के अतिरिक्त टैरिफ के असर का आकलन किया गया, सरकार ने तय किया है कि भारत के मित्र देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर ज़ोर दिया जाएगा। इसके अलावा घरेलू खपत बढाकर निर्यात को लगने वाले झटके में कमी लाने की कोशिश की जाएगी। ट्रंप ने टैरिफ लगाने में भी चालाकी की है। जिन चीजों की खपत अमेरिका में ज्यादा है, उन पर ट्रंप ने अतिरिक्त टैरिफ नहीं लगाया है। उदाहरण के तौर पर भारत अमेरिका को हर साल 9.5 अरब डॉलर की दवाएं निर्यात करता है। दवाओं पर पहले भी अमेरिका कोई टैरिफ़ नहीं लगाता था और अब भी नहीं लगेगा।
इसी तरह भारत दुनिया में स्मार्टफोन का सबसे बड़ा निर्माता है। भारत से हर साल 16.6 अरब डॉलर के स्मार्टफोन अमेरिका को निर्यात होते है। भारत के स्मार्टफ़ोन पर ज़ीरो टैरिफ़ था। ट्रंप ने इसको भी बक़रार रखा है। भारत के पेट्रोकेमिकल निर्यात पर भी अमेरिका ने कोई अतिरिक्त टैरिफ नहीं लगाया है। भारत हर साल अमेरिका को 4.1 अरब डॉलर के petro- chemical प्रोडक्ट बेचता है। पहले इस पर 6.9 परसेंट टैरिफ लगता था, अब भी इसी रेट से टैरिफ लगेगा। ट्रंप का 50% tariff भारत के लिए चुनौती तो है, लेकिन कोई पहाड़ नहीं टूट पड़ेगा। इसका निर्यात पर असर पड़ेगा लेकिन ऐसा भी नहीं है कि ट्रंप के tariff से भारत की अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी।
अगर बढ़े हुए tariff से हमारे निर्यातकों को परेशानी होगी तो अमेरिका में ट्रंप को उपभोक्ताओं की नाराजगी भी झेलनी पड़ेगी। इस मसले पर कई Trade Experts की राय के मुताबिक ट्रंप के tariff से घबराने की जरूरत बिल्कुल नहीं है। वैश्विक स्थिति ऐसी है कि ये tariff ज्यादा दिन तक नहीं रह पाएगा। ट्रंप को इसे कम करना ही पड़ेगा क्योंकि ट्रंप का ये tariff merit पर नहीं है। भारत को परेशान करने के लिए ज्यादा है।
अमेरिका पर भी दोहरे मापदंड अपनाने का दबाव है। ट्रंप से पूछा जा रहा है कि रूस से तो चीन भी तेल खरीदता है, फिर उसे छोड़कर भारत पर 25% अतिरिक्त tariff क्यों लगाया गया? क्या ट्रंप ने रूसी तेल को बहाना बनाया? असली बात ये है कि मोदी ने कृषि और डेयरी उत्पादों के बाजार को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलने से साफ मना कर दिया है। इससे ट्रंप नाराज हो गए। जब भी अमेरिका से भारत की बात दोबारा शुरू होगी, तो ट्रंप से पूछा जाएगा कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों के साथ अलग-अलग तरीके से कैसे सलूक किया जा सकता है? भारत और चीन के लिए अलग अलग पैमाने क्यों?
ये भी पूछा जाएगा कि अगर ट्रंप भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाते हैं तो चीन को छोड़ने का क्या औचित्य है? अमेरिकी व्यापार विशेषज्ञ भी ये मानते हैं कि 50% tariff लम्बे समय तक जारी नहीं रह सकता। ट्रंप प्रशासन पर अंदरूनी दबाव दिख रहा है। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते बहुत अच्छे हैं, पीएम मोदी और  डॉनल्ड ट्रंप के बीच भी अच्छा संबंध है। इसलिए उन्हें उम्मीद है कि जल्दी ही दोनों देश आपसी मसले सुलझा लेंगे और दोनों एक साथ आएंगे।
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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