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भारत के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए रूसी कंपनियों को जयशंकर ने किया प्रोत्साहित

By admin · · 3 min read · 133 views

मॉस्को। रूस की आधिकारिक यात्रा पर गए विदेश मंत्री डॉ० एस० जयशंकर ने मॉस्को में इंडिया-रशिया बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए रूस के साथ व्यापार बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने रूसी कंपनियों को भारतीय कंपनियों के साथ और अधिक व्यापार करने के लिए प्रोत्साहित किया। जयशंकर ने प्रमुख रूसी स्कॉलर्स और थिंक टैंक के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की और भारत-रूस संबंधों के साथ ही वैश्विक भू-राजनीति तथा समकालीन चुनौतियों पर भारत के दृष्टिकोण पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
डॉ० जयशंकर ने 20, अगस्त को व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के 26वें सत्र की सह-अध्यक्षता की। अपने संबोधन में उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार के 2021 में 13 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 68 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की तीव्र वृद्धि पर प्रकाश डाला, साथ ही बढ़ते व्यापार असंतुलन को ठीक करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया, जो नौ गुना बढ़ गया है। उन्होंने आयोग के कार्य को सुदृढ़ करने के लिए उपायों का प्रस्ताव रखा, जिनमें मात्रात्मक लक्ष्य निर्धारित करना, मध्यावधि समीक्षा आयोजित करना, व्यावसायिक मंचों के साथ बेहतर समन्वय को बढ़ावा देना और एजेंडे को व्यापक बनाने के लिए नवीन दृष्टिकोण अपनाना शामिल है।
बाद में विदेश मंत्री भारत-रूस व्यावसायिक मंच में प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के साथ शामिल हुए। व्यावसायिक नेताओं को संबोधित करते हुए, डॉ० जयशंकर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत और रूस न केवल व्यापार के माध्यम से बल्कि निवेश, संयुक्त उद्यमों और गहन सहयोग के माध्यम से भी एक-दूसरे के विकास में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि एक टिकाऊ रणनीतिक साझेदारी एक मज़बूत और टिकाऊ आर्थिक आधार पर टिकी होनी चाहिए।
जयशंकर का रूस दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब हाल ही में अमेरिका ने भारत के उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ में वृद्धि की है, जो दोनों देशों के साथ ही वैश्विक व्यापार प्रवाह को प्रभावित करेगा। ऐसे में अब भारत के लिए रूस के साथ मजबूत जुड़ाव एक समय-परीक्षित साझेदारी की पुष्टि और व्यापार संबंधों में विविधता लाने, कमज़ोरियों को कम करने और वैकल्पिक विकास के रास्ते सुरक्षित करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। भारत में रूसी दूतावास के प्रभारी रोमन बाबुश्किन की टिप्पणी से यह बात और भी स्पष्ट हो जाती है, जिन्होंने कहा कि अगर भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाज़ार में प्रवेश करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, तो रूसी बाज़ार में उनका स्वागत किया जाएगा।
अधिक संतुलन, नवाचार और निवेश पर जोर देकर, भारत यह संकेत दे रहा है कि रूस के साथ उसकी साझेदारी एक लचीली और बहुध्रुवीय आर्थिक व्यवस्था के निर्माण में एक केंद्रीय केंद्र बिंदु बनी रहेगी।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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