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भारत ने यूएन पीसकीपर्स के विरुद्ध अपराध मामलों में की न्याय की अपील

By admin · · 3 min read · 8 views

न्यूयॉर्क। भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों (यूएन पीसकीपर्स) के विरुद्ध अपराधों के मामलों में एक बार फिर न्याय की पुरजोर अपील की है। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 15 जुलाई को शांति सैनिकों के विरुद्ध अपराधों की जवाबदेही हेतु मित्र समूह (जीओएफ) की एक उच्च-स्तरीय बैठक में भारत ने अपना पक्ष रखा। बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत पी. हरीश ने जोर देकर कहा कि शांति सैनिकों के लिए न्याय न केवल महत्वपूर्ण है, बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता भी है।
भारतीय राजदूत ने कहा संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों को लगातार ख़तरनाक होते क्षेत्रों में काम करते समय भारी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन अधिकांशतः, इन अपराधों के लिए कोई सजा नहीं मिलती। जवाबदेही का यह अभाव हमलावरों को और अधिक आत्मविश्वास देकर अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयासों को गंभीर रूप से कमजोर करता है। इसलिए, जवाबदेही एक रणनीतिक आवश्यकता है। कानून द्वारा आवश्यक होने के अलावा, संयुक्त राष्ट्र कर्मियों के विरुद्ध अपराधों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयासों की अखंडता और प्रभावशीलता के लिए आवश्यक है।
हरीश ने कहा जब न्याय मिलता है, तो यह शांति सैनिकों की सुरक्षा और मनोबल को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे वे अपना काम अधिक प्रभावी ढंग से कर पाते हैं। न्याय से शांति सैनिकों की सुरक्षा में सीधे तौर पर सुधार होता है, जिससे वे अपने महत्वपूर्ण मिशनों को अंजाम दे पाते हैं। इस दायित्व को पूरा करना हमारा साझा कर्तव्य है।
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर हरीश के संबोधन की जानकारी साझा करते हुए कहा शांति सैनिकों के विरुद्ध अपराधों की जवाबदेही के लिए मित्र समूह की आज यूएन में बैठक हुई। इस समूह की स्थापना दिसंबर 2022 में सुरक्षा परिषद की भारत की अध्यक्षता के दौरान हुई थी। 1948 से शांति अभियानों में सेवा करते हुए दुर्भावनापूर्ण कृत्यों के परिणामस्वरूप 1,000 से अधिक संयुक्त राष्ट्र कर्मी मारे गए हैं और सैकड़ों अन्य घायल हुए हैं। बैठक में हुई चर्चाओं में कुछ आउटकम निकले हैं, जिनमें जवाबदेही तंत्र को गहन बनाने, कानूनी ढांचों को सुदृढ़ बनाने, क्षमता निर्माण एवं तकनीकी सहायता, न्याय के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना और निवारक उपाय एवं निवारण शामिल हैं।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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