Wednesday, 22 July 2026
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आईआईटी हैदराबाद का जापानी विश्वविद्यालय के साथ एमओयू, बढ़ेगा शैक्षणिक सहयोग

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मात्सु (जापान)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, हैदराबाद और जापान के शिमाने विश्वविद्यालय ने संयुक्त उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस कदम से भारत और जापान के बीच शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग को मजबूती मिलेगी।
शिमाने विश्वविद्यालय में हुए एमओयू हस्ताक्षर समारोह में आईआईटी हैदराबाद के निदेशक प्रो. बी. एस. मूर्ति और शिमाने विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. ओटानी हिरोकी के साथ ही जापान में भारतीय राजदूत सिबी जॉर्ज ने मौजूदगी दर्ज कराई।
आईआईटी हैदराबाद और एक जापानी विश्वविद्यालय के बीच इस तरह का पहला सहयोगी केंद्र होने के कारण संयुक्त उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) एक बड़ी उपलब्धि होगी। यह सीओई दोनों संस्थानों के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी साझेदारी को गहरा करने पर ध्यान केंद्रित करेगा, साथ ही अगली पीढ़ी के मानव संसाधनों के लिए प्रशिक्षण और आदान-प्रदान के अवसरों को बढ़ावा देगा।
शिमाने विश्वविद्यालय जापान के शिमाने प्रान्त के मात्सु शहर में स्थित है। पिछले कुछ वर्षों में, शिमाने विश्वविद्यालय के प्रो. तात्सुयुकी यामामोटो और प्रो. नूथलापति हेमंत ने रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी के क्षेत्र में उन्नत अनुसंधान और विकास पर आईआईटी हैदराबाद के साथ सक्रिय रूप से सहयोग किया है। इनमें से कुछ परियोजनाओं को जापान सरकार से समर्थन मिला है और उन्होंने उत्साहजनक परिणाम दिए हैं।
आईआईटी हैदराबाद के निदेशक प्रो. मूर्ति ने कहा यह एमओयू दोनों संस्थानों के बीच गहन सहयोग को बढ़ावा देते हुए एक नए अध्याय का प्रतीक है। हम मिलकर नवाचार, अनुसंधान और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाएंगे, जिससे दोनों देशों के लिए एक उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा।
शिमाने विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. हिरोकी ने कहा मुझे विश्वास है कि सीओई की स्थापना न केवल शिमाने विश्वविद्यालय और आईआईटी हैदराबाद के बीच सहयोग को गहरा करेगी, बल्कि जापान और भारत के बीच व्यापक शैक्षणिक आदान-प्रदान के लिए उत्प्रेरक का काम भी करेगी। यह पहल वैश्विक दृष्टिकोण के साथ अनुसंधान को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारतीय राजदूत जॉर्ज ने कहा कि यह सीओई वैश्विक ज्ञान साझाकरण, तकनीकी उन्नति और भारत-जापान के बीच मजबूत शैक्षणिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों की प्रतिबद्धता के अनुरूप है, क्योंकि वर्ष 2025 को ‘भारत-जापान विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार आदान-प्रदान का वर्ष’ के रूप में समर्पित किया गया है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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