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आजाद भारत में ऐसा न हुआ, न होगा(शाश्वत तिवारी)

By admin · · 3 min read · 7 views

बहुत से लोग सोचते हैं कि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री भगवा पोशाक पहनते हैं, इसलिए  एक “सन्यासी” हैं, लेकिन उनके बारे में जो तथ्य सामने आए हैं वो चौंकाने वाले ओर प्रेरणादाई हैं। सबको चुनौती है आज तक जितने मुख्यमंत्री हुए हैं और जितने वर्तमान समय में हैं, उनको भी अपना संक्षिप्त परिचय देना चाहिएl

अजय मोहन बिष्ट  (ओरिजिनल नाम)                        सन्यास के बाद योगी आदित्यनाथ आयु-50 वर्ष
जन्म स्थान- पंचूर गाँव,गढ़वाल, उत्तराखंड एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय से उत्तर प्रदेश के इतिहास में सर्वाधिक अंक (100%)
योगी मूलरूप से गणित के छात्र हैं, जिन्होंने बीएससी गणित स्वर्ण पदक के साथ उत्तीर्ण किया है। भारतीय सेना की सबसे पुरानी गोरखा रेजीमेंट के आध्यात्मिक गुरु हैं।
नेपाल में योगी समर्थक का विशाल समूह है, जो योगी को गुरु के रूप में पूजते हैं। मार्शल आर्ट में अद्भुत उत्कृष्टता। चार लोगों को एकसाथ हराने का रिकार्ड।
उत्तर प्रदेश के जाने-माने तैराक। कई विशाल नदियां पार की। एक लेखा विशेषज्ञ जो कंप्यूटर को भी हरा देता है। प्रसिध्द गणितज्ञ शकुंतला देवी ने भी योगी की तारीफ की।
चौबीस घंटों में केवल 04 घंटे की नींद। रोजाना सुबह 3:30 बजे उठ जाते हैं।  योग, ध्यान, गोशाला, आरती, पूजा प्रतिदिन की दिनचर्या है।
दिन में सिर्फ दो बार ही खाते हैं। पूर्णतः शाकाहारी। भोजन में शामिल रहता है कन्द, मूल, फल और देशी गाय का दूध।
वह अब तक किसी भी कारण से कभी अस्पताल में भर्ती नहीं हुए। योगी आदित्यनाथ एशिया के सर्वश्रेष्ठ वन्यजीव प्रशिक्षकों में से एक हैं, उन्हें वन्यजीवों से बहुत प्रेम है।
योगी का परिवार अभी भी उसी स्थिति में रहता है, जैसा उनके सांसद या मुख्यमंत्री बनने के पहले रहता था। योगी सालों पहले सन्यास लेने के बाद सिर्फ एक बार घर गए हैं।
योगी का सिर्फ एक बैंक अकाउंट है और कोई जमीन संपत्ति उनके नाम नहीं है और न ही उनका कोई खर्च है। अपने भोजन कपडे का खर्च वो स्वयं के वेतन से करते हैं और शेष पैसा राहत कोष में जमा कर देते हैं।

ये है योगी आदित्यनाथ की प्रोफाइल:
योगी के सोने वाले कमरे मे कोई  AC या रूम कूलर नही है, केवल एक सीलिंग फैन है।
योगी एक लकडी के तख्त पर एक कम्बल, उसके उपर चादर बिछाकर सोते है, (No Dunlop  Cushion  & Pillow)

भारत में एक सच्चे लीडर की प्रोफाइल ऐसी ही होनी चाहिए। ऐसे संत ही भारत को फिर से विश्व गुरु बना सकते हैं।
@शाश्वत तिवारी

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