Friday, 9 October 2026 Live24×7 News India media
Breaking
  • भारत की दो टूक- अधूरे सुधार से नहीं बदलेगी यूएनएससी की तस्वीर
Latest News

जहाँ कभी सुरक्षा शिविर था, आज वहाँ 150 आदिवासी विद्यार्थी पढ़ रहे हैं

By Gangesh M · · 6 min read · 9 views

जहाँ कभी सुरक्षा शिविर था, आज वहीं संवर रहा है आदिवासी बच्चों का भविष्य

सुरक्षा शिविर से छात्रावास तक: बस्तर में बदलती तस्वीर

साक्षी चतुर्वेदी

छत्तीसगढ़ के बस्तर की कहानी लंबे समय तक संघर्ष, नक्सलवाद और सुरक्षा चुनौतियों के संदर्भ में कही जाती रही है। लेकिन आज इसी बस्तर में बदलाव की एक ऐसी तस्वीर सामने आ रही है, जो यह बताती है कि शांति केवल सुरक्षा का नाम नहीं, बल्कि शिक्षा, अवसर और बेहतर भविष्य का रास्ता भी है।

नारायणपुर जिले के भाटपाल में जिस भवन में कुछ समय पहले तक सुरक्षा बलों का शिविर हुआ करता था, आज उसी परिसर में करीब 150 आदिवासी विद्यार्थी रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। कभी सुरक्षा अभियानों का हिस्सा रहा यह स्थान अब शिक्षा और उम्मीद का केंद्र बन चुका है।

अगस्त से इस परिसर में आसपास के नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थी रह रहे हैं। इनमें अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र से आने वाले छात्र भी शामिल हैं। यह वही क्षेत्र है, जहाँ लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण सामान्य जीवन और शिक्षा तक पहुँच बेहद कठिन रही है।

भाटपाल परिसर में अनुसूचित जनजाति के बालकों के लिए दो छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं, एक प्री-मैट्रिक और दूसरा पोस्ट-मैट्रिक स्तर का। प्री-मैट्रिक छात्रावास में कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थी रहते हैं, जबकि पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास कक्षा 11 और 12 के विद्यार्थियों के लिए है।

प्री-मैट्रिक छात्रावास की स्वीकृत क्षमता 100 विद्यार्थियों की है, लेकिन वर्तमान में यहाँ 114 विद्यार्थी रह रहे हैं। वहीं, पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास में 50 विद्यार्थियों की क्षमता के मुकाबले फिलहाल 39 विद्यार्थी रह रहे हैं। यह संख्या केवल विद्यार्थियों की उपस्थिति नहीं बताती, बल्कि यह भी दर्शाती है कि दूरस्थ क्षेत्रों के आदिवासी परिवार अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर कितने उत्साहित हैं, जब उन्हें सुरक्षित और सुविधाजनक आवास की सुविधा उपलब्ध होती है।

नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य दूरस्थ और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के सामने आने वाली एक बड़ी चुनौती को दूर करना है- विद्यालय के निकट सुरक्षित आवास की उपलब्धता। भाटपाल में पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास की सुविधा उपलब्ध होने से आदिवासी युवाओं के लिए उच्च शिक्षा जारी रखने का रास्ता आसान हुआ है।

यह बदलाव केवल एक भवन के उपयोग में परिवर्तन नहीं है। यह उस सोच का परिवर्तन है, जिसमें कभी किसी स्थान की पहचान सुरक्षा शिविर के रूप में होती थी और आज वही स्थान विद्यार्थियों के सपनों को आकार देने वाला परिसर बन गया है।

छात्रावासों को मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए प्रशासन अब ऐसे और आवासीय केंद्र विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अबूझमाड़ के प्रवेश क्षेत्र कुरुषनार में भी ऐसा ही एक प्रयास आकार ले रहा है।

कुरुषनार का उदाहरण इस बदलाव को और गहराई से समझने का अवसर देता है। वर्ष 2011 में यहाँ एक आवासीय विद्यालय बनाया गया था। उस समय नक्सलियों की अनुमति के बाद विद्यालय का निर्माण हुआ था और उनकी शर्त थी कि भवन पर कंक्रीट की छत या ऊँची चारदीवारी न बनाई जाए, ताकि सुरक्षा बल वहाँ अपना शिविर स्थापित न कर सकें।

समय बदला। क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति बदली और नक्सली प्रभाव कम हुआ। अब इसी क्षेत्र में कुछ वर्ष पहले स्थापित सुरक्षा शिविर को बालिका छात्रावास में परिवर्तित किया जा रहा है। यह छात्रावास जल्द ही तैयार होने की उम्मीद है।

बस्तर में हो रहा यह परिवर्तन एक महत्वपूर्ण संदेश देता है; जब किसी क्षेत्र में शांति स्थापित होती है, तो उसका सबसे सुंदर परिणाम बच्चों के भविष्य में दिखाई देता है।

जहाँ कभी सुरक्षा बलों की मौजूदगी क्षेत्र की आवश्यकता थी, वहीं आज उसी स्थान पर किताबें, कक्षाएँ और विद्यार्थियों के सपने दिखाई दे रहे हैं। यह बदलाव बताता है कि विकास की सबसे मजबूत नींव शिक्षा है।

बस्तर के इन छात्रावासों में रहने वाले बच्चे केवल अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए यहाँ नहीं आए हैं। वे अपने परिवारों, अपने गाँवों और अपने पूरे क्षेत्र के भविष्य की नई कहानी लिखने आए हैं।

किसी सुरक्षा शिविर का छात्रावास में बदल जाना शायद प्रशासनिक दृष्टि से एक भवन का पुनः उपयोग हो, लेकिन सामाजिक दृष्टि से यह उससे कहीं बड़ा परिवर्तन है। यह संघर्ष से शांति, भय से विश्वास और असुरक्षा से अवसर की ओर बढ़ते बस्तर की तस्वीर है।

और शायद किसी भी क्षेत्र में बदलाव की इससे बेहतर तस्वीर नहीं हो सकती कि जहाँ कभी हथियारों की सुरक्षा की आवश्यकता थी, आज वहाँ बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की व्यवस्था हो रही है।

Gangesh M

Leave a Comment