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भारत के लिए महज कूटनीतिक साझेदार नहीं, ‘परिवार’ है सूरीनामः जयशंकर

By admin · · 4 min read · 82 views

पारामारिबो। अपनी पहली आधिकारिक सूरीनाम यात्रा पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर पारामारिबो पहुंचे। उन्होंने सूरीनाम की राष्ट्रपति जेनिफर गियरलिंग्स-सीमन्स से मुलाकात की और अपने समकक्ष विदेश मंत्री मेल्विन बौवा के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। जयशंकर ने सूरीनाम को केवल एक कूटनीतिक साझेदार नहीं, बल्कि ‘परिवार’ बताया। उन्होंने 1873 में ‘लल्ला रुक्ख’ जहाज से भारतीयों के सूरीनाम आगमन और वहां की ‘गिरमिटिया’ विरासत के गहरे संबंधों पर जोर दिया।
यह उनकी 2 से 10 मई तक चलने वाली तीन देशों (जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो) की यात्रा का दूसरा चरण है। यह यात्रा भारत और सूरीनाम के बीच कूटनीतिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रही है, जो ‘ग्लोबल साउथ’ के प्रति भारत की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जयशंकर ने भारत-सूरीनाम संबंधों की व्यापक समीक्षा के लिए 9वीं संयुक्त आयोग बैठक (जेसीएम) की अध्यक्षता की। चर्चा में व्यापार, निवेश, डिजिटल बुनियादी ढांचा, रक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्र शामिल रहे। इस दौरान भारत ने सूरीनाम की सेना और पुलिस की क्षमता निर्माण में सहयोग देने और उनकी रक्षा जरूरतों को पूरा करने की प्रतिबद्धता भी जताई।
डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा सूरीनाम की राष्ट्रपति जेनिफर गीरलिंग्स-साइमन्स से मिलकर मुझे बहुत खुशी हुई। मैंने भारत की ओर से सूरीनाम की सरकार और वहां के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। हमारे दोनों देश भारत-सूरीनाम के गहरे और लंबे समय से चले आ रहे संबंधों की पूरी क्षमता को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
जेसीएम के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने एक्स पर लिखा हमने व्यापार, डिजिटल और निवेश, रक्षा और ऊर्जा, विकास सहायता और क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य और आवाजाही, संस्कृति और लोगों के बीच आदान-प्रदान जैसे विषयों पर चर्चा की। हमें पूरा भरोसा है कि आज हमारी चर्चाओं के जो नतीजे निकले हैं, उनसे हमारे संबंध और भी गहरे और विविध होंगे।
उन्होंने भारतीय अनुदान से वित्तपोषित एक पैशन फ्रूट प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट का उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य स्थानीय किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है। भारत ने सूरीनाम की विकास प्राथमिकताओं के लिए नई ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ देने की पेशकश की है। पूर्व में भारत ने यहां बिजली ट्रांसमिशन लाइनों और जल पंपिंग स्टेशनों जैसे प्रोजेक्ट्स पूरे किए हैं। भारत के यह कदम ‘ग्लोबल साउथ’ के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को और मजबूती प्रदान करने वाले हैं।
इससे पहले उन्होंने मायरिनबर्ग में ‘फालन हीरोज’ स्मारक पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सूरीनाम में रह रहे भारतीय मूल के लोगों के साथ बातचीत भी की, जो वहां की आबादी का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा हैं। सूरीनाम के ‘टाइम्स ऑफ सूरीनाम’ अखबार में जयशंकर का एक आलेख भी छपा है, जिसमें उन्होंने इस देश को ‘परिवार’ बताते हुए बहुआयामी सहयोग के और गहरा होने की बात कही है। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर भी यह बात साझा की कि भारत और सूरीनाम के बीच के ‘सभ्यतागत संबंध’ उन्हें एक परिवार की तरह जोड़ते हैं।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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