जयशंकर ने ‘पश्चिम एशिया के हालात’ पर संसद में दिया सुओ मोटो स्टेटमेंट

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नई दिल्ली। राज्यसभा और लोकसभा में ‘पश्चिम एशिया के हालात’ पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपनी तरफ से एक बयान (सुओ मोटो स्टेटमेंट) दिया। इस दौरान उन्होंने तनाव कम करने और अंदरूनी मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत एवं डिप्लोमेसी अपनाने पर जोर दिया और साथ ही संकट के समय में पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी अपनी बात रखी। विदेश मंत्री ने क्षेत्र के सभी देशों की सॉवरेनिटी और टेरिटोरियल इंटीग्रिटी का सम्मान किए जाने पर जोर दिया।
विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, डॉ. जयशंकर ने राज्यसभा में कहा, पीएम नए हो रहे डेवलपमेंट पर करीब से नज़र रख रहे हैं और संबंधित मंत्रालय असरदार जवाब देने के लिए कोऑर्डिनेट कर रहे हैं। पूरे इलाके में आम ज़िंदगी और आर्थिक गतिविधियां साफ तौर पर प्रभावित हुई हैं और कुछ मामलों में तो रुक भी गई हैं। इसलिए, हमने 3 मार्च को बातचीत और डिप्लोमेसी के लिए अपनी अपील दोहराई और झगड़े को जल्द खत्म करने की बात कही। मुझे पूरा भरोसा है कि जानमाल के नुकसान पर दुख जताने में पूरा सदन मेरे साथ है।
उन्होंने कहा लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं। ईरान में भी, कुछ हज़ार भारतीय पढ़ाई या नौकरी के लिए हैं। यह इलाका हमारी एनर्जी सिक्योरिटी के लिए बहुत ज़रूरी है और इसमें तेल और गैस के कई ज़रूरी सप्लायर शामिल हैं। खाड़ी देश एक बड़ा ट्रेड पार्टनर भी है, जो हर साल लगभग 200 अरब डॉलर का है। सदन को यह भी पता है कि पिछले दशक में इस इलाके से भारतीय अर्थव्यवस्था में काफ़ी निवेश हुआ है। इसलिए सप्लाई चेन में गंभीर रुकावटें और अस्थिरता का माहौल, जो हमें लगता है, गंभीर मुद्दे हैं। इसके अलावा इनमें मर्चेंट शिपिंग पर हमले भी शामिल हैं, जहां भारतीय नागरिक अक्सर क्रू का एक बड़ा हिस्सा होते हैं।
विदेश मंत्री ने बताया कि सरकार जून 2025 में 12 दिन के युद्ध के बाद से लगातार पश्चिम एशिया की स्थिति का आकलन कर रही है और सरकार ने ईरान सहित इलाके के सभी देशों में समय रहते विभिन्न एडवाइजरी के जरिए भारतीय समुदाय को सावधान किया है। मैं भी इन देशों में अपने काउंटरपार्ट्स के साथ करीबी संपर्क में रहा हूं। उन्होंने कहा डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ शिपिंग मुंबई ने भी भारतीय नाविकों के लिए अपनी एडवाइजरी जारी की, जिसमें उनसे एम्बेसी की एडवाइजरी का पालन करने और गैर-ज़रूरी आवाजाही से बचने के लिए कहा गया है।
जयशंकर ने बताया कि लड़ाई शुरू होने के बाद भारतीय दूतावास ने कई इंडियन स्टूडेंट्स को तेहरान के बाहर दूसरी जगहों पर शिफ्ट करने में मदद की है। हमारे डिप्लोमैट्स ने दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे हब में फंसे ट्रांज़िट पैसेंजर्स की मदद के लिए भी बहुत मेहनत की है। उन्होंने अंत में डी-एस्केलेशन, संयम और आम लोगों की सुरक्षा पक्का करने की वकालत करते हुए कहा कि एनर्जी सिक्योरिटी और ट्रेड फ्लो सहित हमारा राष्ट्रीय हित हमेशा सबसे ऊपर रहेगा।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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