पड़ोसी प्रथमः म्यांमार में 58 करोड़ डॉलर के 10 प्रोजेक्ट्स शुरू करेगा भारत

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नेपीडॉ। भारत सरकार ने म्यांमार के लोगों की तत्काल आवश्यकता वाली पहलों को समर्थन देने के लिए अगले पांच वर्षों में 58.25 करोड़ डॉलर की राशि देने की प्रतिबद्धता जताई है। भारत अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति पर चलते हुए म्यांमार में 10 त्वरित प्रभाव परियोजनाएं (क्यूआईपी) शुरू करने जा रहा है, जिससे पड़ोसी देश की कृषि उत्पादकता बढ़ेगी, नवीकरणीय ऊर्जा तक पहुंच स्थापित होगी और साथ ही उसके बुनियादी ढांचे को भी मजूबती मिलेगी। दोनों देशों ने 17 नवंबर को आयोजित एक हस्ताक्षर समारोह में क्यूआईपी की औपचारिकताएं पूरी की।
म्यांमार स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार को एक बयान में कहा, भारत सरकार द्वारा सहायता प्राप्त दस त्वरित प्रभाव परियोजनाओं (क्यूआईपी) के लिए आज नेपीडॉ में हस्ताक्षर समारोह आयोजित हुआ। इन परियोजनाओं का सामूहिक उद्देश्य म्यांमार की कृषि उत्पादकता, सांस्कृतिक संरक्षण, आपदा प्रतिक्रिया क्षमता, नवीकरणीय ऊर्जा तक पहुंच, बुनियादी ढांचे का रखरखाव और मानव संसाधन विकास को बढ़ावा देना है, ताकि म्यांमार के राज्यों और क्षेत्रों के लोगों को लाभ मिल सके।
इस समारोह की अध्यक्षता भारतीय राजदूत अभय ठाकुर और केंद्रीय निवेश एवं विदेशी आर्थिक संबंध मंत्री डॉ० वाह वाह मौंग ने की। हस्ताक्षर समारोह में भारतीय पक्ष की ओर से मिशन के उप प्रमुख आशीष शर्मा
मौजूद रहे। वहीं म्यांमार की ओर से राष्ट्रीय योजना मंत्रालय, धार्मिक मामलों एवं संस्कृति मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, पशुधन एवं सिंचाई मंत्रालय, सहकारिता एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय, निर्माण मंत्रालय, समाज कल्याण, राहत एवं पुनर्वास मंत्रालय, जातीय मामलों के मंत्रालय, मांडले क्षेत्र सरकार और सागाइंग क्षेत्र सरकार के नामित प्रतिनिधियों द्वारा सभी क्यूआईपी से जुड़े समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।
भारतीय दूतावास ने कहा, जीआईपी कार्यक्रम के अंतर्गत, भारत सरकार ने म्यांमार के लोगों की तत्काल आवश्यकता वाली पहलों को समर्थन देने के लिए अगले पांच वर्षों में 582.5 मिलियन डॉलर की राशि देने की प्रतिबद्धता जताई है। इस व्यवस्था के अंतर्गत, पिछले दो वर्षों में यांगून क्षेत्र, ने पी ताव, मांडले, रिंग्टन, तनिंथारिस क्षेत्र, सागाइंग क्षेत्र, नागा स्व-शासित क्षेत्र और माग्वे क्षेत्रों में कृषि, ग्रामीण विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, ई-लर्निंग एवं शिक्षा, हथकरघा तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में ग्रामीण बुनियादी ढांचे के लिए 7,50,000 अमेरिकी डॉलर की राशि की इसी प्रकार की पहलों को समर्थन दिया गया है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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