भारत-श्रीलंका फाउंडेशन के निदेशक मंडल की बैठक, कई नए प्रस्तावों को मंजूरी

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कोलंबो। भारत-श्रीलंका फाउंडेशन (आईएसएलएफ) के निदेशक मंडल की 40वीं बैठक कोलंबो में आयोजित हुई। इस सत्र की सह-अध्यक्षता श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा और भारत में श्रीलंका की उच्चायुक्त महिषिनी कोलोन ने की। बोर्ड ने चल रही परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और संस्कृति, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि एवं क्षमता निर्माण सहित विविध क्षेत्रों में कोलंबो तथा नई दिल्ली सचिवालयों द्वारा प्राप्त कई नए प्रस्तावों को मंजूरी भी दी।
कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने एक बयान में कहा उल्लेखनीय स्वीकृत पहलों में पुस्तकालय विज्ञान और दृश्य एवं प्रदर्शन कलाओं में अकादमिक सहयोग, दोनों देशों में सांस्कृतिक कार्यशालाएं और पर्यटन संवर्धन गतिविधियां, श्रीलंका में पादप रोगों की रोकथाम के लिए माइक्रोबायोम इंजीनियरिंग अनुसंधान, कमजोर समुदायों के लिए कैंसर और मासिक धर्म स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, भारत में श्रीलंकाई स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए प्रशिक्षण के अवसर शामिल रहे। इसके अलावा जिन अन्य पहलों पर सहमति बनी, उनमें महिला सशक्तिकरण कार्यशालाएं और वंचित समुदायों के लिए सहायता कार्यक्रम, मत्स्य पालन अधिकारियों के लिए इस क्षेत्र को मजबूत करने हेतु क्षमता निर्माण पहल और तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव पुनर्स्थापन परियोजनाओं के साथ-साथ विज्ञान एवं पर्यावरण के क्षेत्रों में ज्ञान साझाकरण कार्यक्रम शामिल हैं।
बैठक में फाउंडेशन के बोर्ड सदस्य राजदूत मोहन कुमार, अशोक मलिक, राजदूत प्रसाद करियावासम और राजदूत एसाला वीराकून भी उपस्थित थे। भारत-श्रीलंका फाउंडेशन की स्थापना दिसंबर 1998 में भारत-श्रीलंका सरकारों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के साथ हुई थी, जिसका उद्देश्य आर्थिक, वैज्ञानिक, शैक्षिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ाकर द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देना और साथ ही दोनों देशों के बीच लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देना था।
अपनी स्थापना के बाद से फाउंडेशन ने 200 मिलियन श्रीलंकाई रुपये से अधिक मूल्य की लगभग 600 परियोजनाओं के लिए समर्थन प्रदान किया है, जिनमें से 360 से अधिक परियोजनाएं श्रीलंका में कार्यान्वित की जा रही हैं।

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