मनुष्य समाज का सबसे महत्वपूर्ण जीव है जिसे प्रकृति और समाज को सुधारने से लेकर उसके संपूर्ण विनाश की प्रक्रिया अच्छे से पता है । एक ओर जहाँ मनुष्य नित प्रतिदिन नए आयामों को पूरा कर अपनी बुद्धिमता से अपने समाज को प्रेरित कर लक्ष्यों को प्राप्त कर रहा है वहीं अपनी अनैतिक एवं तुच्छ मानसिकता से समस्त मानव जाति को कलंकित भी कर रहा है । आज का समाज इस प्रकार से परिभाषित होता नजर आता है जहाँ पशु मानवीय छवि में दिखाई देता है और मनुष्य हिंसक जानवर । आज कोई क्षेत्र ऐसा ना बचा जो आपराधिक गतिविधियों से अछूता हो । क्या सार्वजनिक स्थान क्या व्यक्तिगत आज कोई स्थान अछूता नहीं रहा जहाँ आज स्त्री सुरक्षित हो जबकि हमारे भारतीय इतिहास की हर कहानी स्त्री की रक्षा को सर्वोपरि रखा जाता था और लोगो में भावपूर्ण कर्तव्यों का निरंतर आहवाहन किया जाता था की “ यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ।। मनुस्मृति ३/५६ ।। “
परंतु आज की स्थिति बिल्कुल विपरीत है आज का युवा समस्त संस्कारों को त्याग कर केवल सोशल मीडिया की काल्पनिक जीवन में व्यस्त है और किसी भी स्तर तक मानवीय मूल्यों को त्याग कर नग्नता, वैश्यावृत्ति और मादक पदार्थों में लिप्त होता जा रहा है जिससे निकलना लगभग अनिश्चित है । स्त्री की लज्जा की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर देने वाला समाज आज ब्लात्कार जैसे विभंसक कुक्रत्यों पर रैली निकलता है मोमबत्ती जलाता है । हाल ही के एक न्यायिक आदेश को देते हुए माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय ने कहा कि कोई भी महिला अधिवक्ता POSH कानून के अपराध के तहत अपने उपर बीती आपराधिक गतिविधि में कानून का सहारा नहीं ले सकती । हाँ समाज में कानून की शक्तियों का दुर्पयोग तो होता है फिर चाहे वो दहेज का झूठा मुकदमा हो या फिर अन्य अनेक मामले पर जहाँ समाज को मिल कर एक सभ्य समाज का निर्माण करना चाहिए वहाँ आज का युवा केवल अपने लाभ के बारे में सोचता है और समस्त सामाजिक कुरीतियों को नज़रअन्दाज़ कर अपनी दिनचर्या में व्यस्त रहता है परंतु उसे इसका आभास तब होता है जब इन सबका शिकार उसका ख़ुद का परिवार होता है । सरकार के सहारे समाज नहीं सुधारा जा सकता इसके लिए हमे स्वयं आगे आना होगा और बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ से पहले ये समझना होगा कि बेटा बेटी एक समान सबको दो बराबर सम्मान ।
दीपक वर्मा (अधिवक्ता एवं विधि प्रशिक्षक)
मा॰ उच्च न्यायालय इलाहाबाद लखनऊ खण्डपीठ
