नीति आयोग के सदस्य डॉ. विनोद के. पॉल से मिलीं डॉ. निरुपमा सिंह, 18 वर्षों की सामाजिक सेवा के अनुभव किए साझा

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नीति आयोग में पहुँचीं डॉ. निरुपमा सिंह, डॉ. विनोद पॉल से स्वास्थ्य व जनसेवा के कार्यों पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा

नई दिल्ली – स्तुति चैरिटेबल सोसाइटी की अध्यक्ष और समाजसेविका डॉ. निरुपमा सिंह ने नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (नीति आयोग) के सदस्य और वरिष्ठ चिकित्सक वैज्ञानिक डॉ. विनोद के. पॉल से शिष्टाचार भेंट की और उनसे मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस अवसर पर डॉ. सिंह ने अपने द्वारा संचालित सामाजिक कार्यों और जागरूकता अभियानों से संबंधित एक विस्तृत बुकलेट उन्हें भेंट की और अब तक की सेवा यात्रा की जानकारी साझा की।

डॉ. निरुपमा सिंह ने इस दौरान स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, कैंसर जागरूकता, और सामाजिक विकास जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि स्तुति चैरिटेबल सोसाइटी के माध्यम से वे महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने, समय पर जांच, संतुलित पोषण, और मानसिक मजबूती के प्रति प्रेरित करने जैसे प्रयास कर रही हैं।

डॉ. सिंह ने अवगत कराया कि वे विगत 18 वर्षों से लगातार कैंसर पीड़ितों और उनके परिजनों की सेवा में लगी हुई हैं। लखनऊ के विभिन्न प्रमुख अस्पतालों में वह मरीजों के तीमारदारों को निःशुल्क भोजन, अस्थायी निवास व्यवस्था, एवं मानसिक सहयोग उपलब्ध कराती हैं। साथ ही, वे बच्चों की शिक्षा और वृद्धजनों की सेवा को भी अपने कार्यों का अभिन्न हिस्सा मानती हैं।

इस मुलाक़ात के दौरान डॉ. विनोद के. पॉल ने डॉ. सिंह के कार्यों की सराहना करते हुए सुझाव दिया कि स्तुति चैरिटेबल सोसाइटी को अपने अन्य सामाजिक सेवा कार्यक्रमों के साथ-साथ नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों में स्तनपान (ब्रेस्ट फीडिंग) तथा एनीमिया के प्रति भी जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर प्रभावी प्रचार-प्रसार के माध्यम से समाज को शिक्षित करना बेहद आवश्यक है, ताकि शिशु और मातृ स्वास्थ्य को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।

डॉ. सिंह ने बताया कि स्तुति चैरिटेबल सोसाइटी पहले से ही समाज के हर वर्ग तक पहुँचने और उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा, और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रेरित करने हेतु लगातार प्रयासरत है। नीति आयोग के साथ यह संवाद न केवल उनके कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देता है, बल्कि भविष्य में और अधिक प्रभावी सामाजिक हस्तक्षेप की दिशा में एक प्रेरक कदम सिद्ध होगा।

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