एसटीईएम शिक्षा में महिलाओं की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित कर रहा भारत

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न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र में भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने यहां यूएन मुख्यालय में आयोजित एक सभा के दौरान भारत में विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं एवं लड़कियों की बढ़ती भागीदारी को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित (एसटीईएम) शिक्षा में महिलाओं की सबसे बड़ी हिस्सेदारी के साथ, भारत ने महिलाओं और लड़कियों को विज्ञान में अध्ययन करने और करियर बनाने के लिए विशेष तौर पर प्रोत्साहित किया है और इसके लिए कई योजनाएं भी शुरू की गई हैं।
पटेल ने ‘विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ को मनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अपनी महिलाओं और लड़कियों को विज्ञान को अपनाने तथा इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि वह भी भारत की ग्रोथ स्टोरी का नेतृत्व कर सके।
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने बुधवार को पटेल के हवाले से ‘एक्स’ पर लिखा दुनिया भर में एसटीईएम शिक्षा में महिलाओं की सबसे बड़ी हिस्सेदारी के साथ, भारत ने महिलाओं और लड़कियों को विज्ञान में अध्ययन करने और करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए इंस्पायर, डब्ल्यूओएस और किरण-डब्ल्यूआईएसई जैसी कई पहल की हैं।
भारतीय राजदूत ने आगे कहा इसरो में अंतरिक्ष मिशनों का नेतृत्व करने वाली महिला वैज्ञानिकों से लेकर डीआरडीओ में मिसाइलों को डिजाइन करने वाले इंजीनियरों तक, प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में प्रसिद्ध विज्ञान प्रोफेसरों से लेकर जैव प्रौद्योगिकी और फिनटेक में तकनीकी उद्यमियों तक, भारत अपनी महिलाओं और लड़कियों को विज्ञान को अपनाने और विज्ञान में करियर बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है, ताकि इंडिया-डेवलपमेंट स्टोरी का नेतृत्व किया जा सके।
बता दें कि 2015 में यूएन महासभा ने 11 फरवरी को विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों के अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित किया था। तब से यह विज्ञान के क्षेत्र में लिंग आधारित भेदभाव को खत्म करने और महिलाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवाचार के लिए प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण मंच बना हुआ है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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