संप्रदायाचार्य स्वामी लक्ष्मणदास महाराज के पावन सानिध्य में लखनऊ में भागवत कथा होना हमारा सौभाग्य- बृजेश पाठक

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संप्रदायाचार्य स्वामी लक्ष्मणदास महाराज के पावन सानिध्य में लखनऊ में भागवत कथा होना हमारा सौभाग्य- बृजेश पाठक

लखनऊ/ कृष्ण कृपा मिशन के तत्वावधान में लखनउ में आयोजित भागवत कथा के मध्य परम पूज्य परम श्रद्धेय पूज्य स्वामी लक्ष्मणदास महाराज ने सभी भक्तों को संबोधित करते हुए कहा की भागवत कथा का प्राण है, महारास उत्सव अगर हम महारास की कथा को श्रवण करते हैं तो हमारे जीवन में कामवासना दूर होती है और अंतर्मन पवित्र होते हुए भगवान श्रीकृष्ण के भक्ति में तल्लीन होता है।
आशियाना भागवत कथा में आज मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने अपने संबोधन में कहा की कृष्ण कृपा मिशन चैरिटेबल ट्रस्ट जो सेवा और समर्पण के लिए जाना जाता है ।
सनातन धर्म के प्रमुख स्तंभ गंगा गायत्री गीता इनके संरक्षण और संवर्धन में कृष्ण कृपा मिशन वर्ष 2014 से निरंतर कार्य करता आ रहा है।
लाखों असहाय जनों की सेवा कार्य हो या फिर प्रत्येक वर्ष गरीब कन्याओं का विवाह और वैदिक संरक्षण के लिए गरीब विद्यार्थियों के शिक्षा की व्यवस्था। यह सब कुछ संभव हो पा रहा है करुणा, दया एवं कृपा के साक्षात प्रतिमूर्ति रामानुज संप्रदायाचार्य स्वामी लक्ष्मणदास जी महाराज के पावन सानिध्य में।
इस भागवत का प्रेम भाव से निमंत्रण मुझे मेरे लखनऊ विश्वविद्यालय के मित्र छोटे भाई वरिष्ठ पत्रकार शाश्वत तिवारी ने दिया मैंने तुरंत संकल्प लिया कि मुझे यहां आना है और आज मैं आपके बीच में उपस्थित हूं।
पूज्य गुरुदेव पिछले कई वर्षों से निरंतर श्रीमद्भागवत कथा, श्री राम कथा, धर्म अध्यात्म एवं सनातन की सेवा के माध्यम से लाखों – करोड़ों लोगों को नई दिशा देते हुए अध्यात्म के उच्चतम शिखर तक पहुँचा रहे हैं तथा नये भारत निर्माण की भूमिका भी तैयार कर रहे हैं जहाँ समाज में देशभक्ति के साथ प्रेम सौहार्द और भाईचारा हो ।
पूज्य गुरुदेव का लक्ष्य है भारत पुनः विश्व गुरु के पद पर आसीन हो और संपूर्ण विश्व में सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र के रूप में भारत अपनी भूमिका निभाए।
और अब पूज्य गुरुदेव का यह स्वप्न धीरे-धीरे साकार हो रहा है। श्री अयोध्या जी में श्री रामलला जी विराजमान होने जा रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारत की भूमिका बढ़ती जा रही है ।
पूज्य गुरुदेव का मानना है राष्ट्र प्रेम सर्वश्रेष्ठ प्रेम है।
आज भागवत कथा के छठा दिन की कथा में स्वामी लक्ष्मण दास ने बताया कि महारास में 19 प्रकार की गोपियां थी और लगभग 6 महीने तक महारास लीला का उत्सव चला महारास उत्सव ऐसा जैसे मानो आत्मा और परमात्मा का संबंध है। यह दो शरीर का संबंध नहीं है यह शाश्वत प्रेम का संबंध है।उन सभी गोपियों ने जीवन में प्रेम की पराकाष्ठा को प्राप्त किया था तभी उन्हें महारास में भाग लेने का सौभाग्य मिला
वर्तमान समय में हर कोई प्रेम की बात करता है लेकिन अगर प्रेम है तो वह शाश्वत है प्रेम ही परमात्मा का स्वरूप है प्रेम हमेशा विशुद्ध होता है प्रेम कभी वासनात्मक हो ही नहीं सकता जहां प्रेम है वही परमात्मा है और अगर आपको प्रेम सीखना है तो गोपियों से सीखिए भगवान श्री कृष्ण के प्रति जो भाव श्रद्धा निष्ठा समर्पण गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण के प्रति रखा वही शाश्वत प्रेम है अन्यथा वर्तमान समय में जो प्रेम है वह सब स्वार्थ है या वासनात्मक है।
आप चाहे कितने भी ज्ञानी हो जाए कितने भी शिक्षित हो जाएं परंतु अगर आपके जीवन में प्रेम नहीं हैं और आपको समाज से राष्ट्र से मानवता से प्रकृति से जीव जंतु से प्रेम नहीं है तो आपका ज्ञान किसी काम का नहीं।
श्री उद्धव जी जो ज्ञानियों में सर्वश्रेष्ठ थे ज्ञान के स्वरूप भगवान बृहस्पति के प्रिय शिष्य थे परंतु जब वृंदावन गए तो वृंदावन की सीमा पर जाते ही उन्होंने प्रेम भाव ब्रज वासियों का भगवान श्री कृष्ण के प्रति देखकर हतप्रभ हो गए।
इसीलिए किसी कारणवश अगर आप ज्ञान नहीं भी अर्जित कर पाए हैं तो संसार से प्रकृति से प्रेम करना सीखिए सब में परमात्मा का स्वरूप मानकर सबसे मीठा बोलिए आप ऐसा करके देखिए अगर आपका जीवन आनंदित ना हो जाए तो कहिएगा। इसीलिए प्रत्येक जीव से हमें प्रेम करना चाहिए।
आज भागवत में नोएडा से अश्वनी कुमार, धर्मेंद्र नागर, आशीष तिवारी, सुशील दुबे, दुर्गेश पाण्डे, मनीष सिंह, कमेंद्र सिंह शामिल हुए।
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(शाश्वत तिवारी)
वरिष्ठ पत्रकार
सदस्य, मुख्य आयोजक मंडल
8090203000

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