रेत पर क़दमो के निशाँ छोड़ गया कौन ?

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डाॕ शाहिदा-प्रबन्धक-न्यू एन्जिल्स सी.से.स्कूल, प्रतापगढ़ यू.पी…

रेत पर क़दमों के निशां छोड़ गया कौन
दरिया पर अक्स अपना छोड़ गया कौन?

हम तो शाखों औ टहनी को थामे खड़े थे
एक पल में झटके से उसे तोड़ गया कौन?

ज़िन्दगी को बहुत आसान समझने वालो
इक नई मंज़िल की तरफ़़ मोड़ गया कौन?

आंसुओं से था ये दामन मेरा जो तर बतर
चुपके से आकर इसको निचोड़ गया कौन?

दुनिया तो एक है पर सब अलग अलग हैं
फिर बेतार के इन तारों को जोड़ गया कौन?

सारे रिश्ते नाते,अपने पराए उसके साथ थे
अन्त समय हम सब से मुँह मोड़ गया कौन?

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